आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसका इतिहास आज हम जानेंगेकि आखिर कैसे2024 या भविष्य मेंअलग ही दुनिया के रूप मेंआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाआप जमेगाऔर इसका क्या इतिहास है वह भी जानेंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत जो इसका प्रारंभिक विचार था 1940 से 1950 के दशक में यह 1943 के कंप्यूटिंग मशीनरी एवं इंटेलिजेंस में 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस1950 के थे कैलकुलेटिंग मशीन में एलेन न्यू वाले और हर्बर्ट साइमन जनरल प्रोबलम सॉल्वर यानी कि जीपीएस की अवधारणा की 

अब बात आती है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की 1956 में दांत माउथ कॉलेज में एक सेमिनार ओं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आयोजित किया गया जहां कितनी बुद्धिमंता

 जिसे हम इंग्लिश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द को पढ़ा गया था जो कि इसकी शुरुआत यहीं से दादा माउथ कॉलेज में ही हुई वह भी एक सेमिनार में ।

जिसे हम इंग्लिश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द को पढ़ा गया था जो कि इसकी शुरुआत यहीं से दादा माउथ कॉलेज में ही हुई वह भी एक सेमिनार में । 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जो ज्ञान का अभिवेदन और तर्क हुआ 1970 1980 के बीच मेंऔर 1974 में मार्विन मीन इसकी और सोमवार पेपर ने सोसाइटी ऑफ मन की अवधारणा पेश की

 जिसमें बुद्धि को कई सरल संतों की बातचीत के रूप में समझाया गया था।हम आपको बता दे की 1980 ने हाइपरटेक्स्ट अवधारणा पेश की जो www के लिए आधार बनी थी

शीशे के पश्चातमशीन लर्निंग का उदय हुआ 1980 और सन 2000 के बीच में 1982 में अर्थ और सैमुअल ने चेक्स खेलने के लिए मशीन लर्निंग शब्द का इस्तेमाल किया। 

और 1997 से आईबीएम का एक डीप ब्लू शतरंज के बीच चैंपियन गहरी ट्रांसफरों को हराने वाला पहला कंप्यूटर बना था।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता सन 2023 से 2024 के अप्रैल माह तक छेद गुप्त का और गूगल कंपनी केगूगल बर्ड ए से जैमिनी तक के सफरमें बहुत ही खोज का एक आकर्षक बना रहा ।